Hindi Motivational Story जब थक जाओ तो ये कहानी पढ़ लेना ।

Hindi Motivational Story 

Friends, जीवन में प्रेरणादायक कहानियों (Motivational Story In Hindi) का एक अलग ही महत्त्व है. जीवन में काफी बार ऐसा समय भी आता हैं, जब हम खुद को निराशा के भंवर में फंसा लेते है। ऐसे में किसी के बोले गए प्रेरक शब्द या कहीं लिखे प्रेरक वाक्य या फिर प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Story In Hindi) हमें निराशा के उस भंवर से बाहर निकालने में सयोग देती है और नए जोश से जीवन जीने की प्रेणा देती है।

कहानी भगवान गौतम बुद्ध की ।
बात उन दिनों की है जब उनकी उम्र हो चली थी। लेकिन तब भी वह गांव से गांव, शहर से शहर जाकर के प्रवचन और उपदेश दिया करते थे। एक दिन वे अपने शिष्य आनंद के साथ गांव से निकले थे और दूसरे गांव का रास्ता बड़ा लंबा था। चलते चलते थक चुके थे। उनकी उम्र हो चुकी थी इसलिए चला भी नहीं जा रहा था। लेकिन अपने शिष्य आनंद को लगातार कह रहे थे कि कोई बात नहीं पहुंच जाएंगे। वो लोग लगातार चलते रहे, चलते रहेशिष्य । कुछ व्यक्ति खेत में काम करते दिखाई दिए। आनंद ने कहा कि भगवान पूछ लेते हैं कि कितना दूर और बचा है तो उन्होंने कहा ठीक है।  उस व्यक्ति से पूछा,” बाबा जी कितना दूर और जाना है उस गांव के लिए”, वो बोले बस 2 किलोमीटर और बचा है। भगवान गौतम बुद्ध उसकी तरफ देख कर के मुस्कुरा दिए। वह भी उनकी तरफ देख करके मुस्कुरा दिया।

Hindi Motivational Story जब थक जाओ तो ये कहानी पढ़ लेना

उसके बाद में वहां से आगे बढ़ गए  और  2 किलोमीटर शायद पार हो चुके थे। आनंद को थकान हो रही थी। उसने फिर से कहा कि रुक जाते हैं, पूछ लेते हैं किसी से और कितना जाना है। उन्होंने देखा कि एक बूढ़ी अम्मा सर पर लकड़ियां  लेकर जा रही थी। उन अम्मा से पूछा कि “माताजी गांव कितनी दूर है”। माता जी ने कहा, अरे आप आ ही तो गए हो बस 2 किलोमीटर और बचा है। लगभग लगभग पहुंच  ही गए हो। अब ज्यादा दूर नहीं है । भगवान गौतम बुद्ध उनको देखकर के हल्के से हंस दिए। वह भी उनकी तरफ देख कर के हंस दी । अब की बार आनंद को और बुरा लगा कि यह क्या चल रहा है। भगवान गौतम बुद्ध ने कहा कि चलते रहते हैं, पहुंच जाएंगे अब बहुत पास में है।

कमजोर तब रुकते हैं जब वो थक जाते हैं, और विजेता तब रुकते हैं जब वो जीत जाते हैं!"
कमजोर तब रुकते हैं जब वो थक जाते हैं,
और विजेता तब रुकते हैं जब वो जीत जाते हैं!”

अब तो हम पहुंचने वाले हैं, चलते रहते है। लगभग वह 2 किलोमीटर और निकल गए थे। थक कर के चूर हो चुके थे। तभी उन्हें तीसरा आदमी दिखाई दिया। उस तीसरे आदमी से भी पूछा कि भाई साहब गांव कितनी दूर और बचा है उसने भी यही कहा कि बस 2 किलोमीटर और बचा है।  आप चलते रहो, बस आने वाला है। आप गांव शाम होने से पहले पहले पहुंच जाओगे और यह कह कर के वहां से चला गया। तीसरा व्यक्ति वहां से चला गया तो आनंद ने जो- जो समान उठाया हुआ था, उसे जमीन पर पटक दिया और भगवान गौतम बुद्ध को कहा कि गुरुदेव माफी चाहता हूं, मुझे मालूम है। आप कहते हैं कि फालतू सवाल नहीं करने चाहिए। फालतू के सवालों से हमारी ऊर्जा व्यर्थ होती है। लेकिन आज मैं आपसे पूछना चाहता हूं। आप यह क्या करवा रहे है, पहला वाला दिखा तो उसे देखकर क्या मुस्कुरा दिए, दूसरी  फिर माता जी को देख कर आप हंस दिए। हर कोई हमसे कह रहा है कि 2 किलोमीटर 2 किलोमीटर, पर गांव आने का नाम नहीं ले रहा है। आप यह क्या कर रहे है मुझे इसका उत्तर दीजिए। मुझे जानना है और मुझसे अब चला नहीं जा रहा है।

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भगवान गौतम बुद्ध ने कहा कि शांत हो जाओ आनंद । मुझे मालूम है कि गांव अगले 2 किलोमीटर के बाद में भी नहीं आएगा। तुम्हें शायद याद नहीं, लेकिन मैं इस जगह पर पहले भी आया हूं और यह गांव 20 किलोमीटर है। जब पहले वाले व्यक्ति ने जो खेत में किसान काम करा था, उसने बताया था कि 2 किलोमीटर बचा है। तब भी मैंने कुछ नहीं कहा। मुझे मालूम था कि दूर है इसीलिए मैं उनको देख करके मुस्कुरा दिया। वह भी मुझे देख करके मुस्कुरा दिए।उन्हें समझ में आ गया कि हम दोनों का काम  एक ही है। दूसरों को लगातार प्रेरित करना। पिछले इतने सालों से लगातार लोगों को प्रेरित कर रहा हूं। प्रोत्साहित (मोटिवेट) कर रहा हूं कि आगे बढ़ो, मंजिल मिलेगी। दूसरी अम्मा जब मिली तो उन्होंने भी कहा कि 2 किलोमीटर और बचा, बस पहुंच गए। उन्हें भी देख कर के मैं हंस दिया, क्योंकि वह भी समझ गई कि हम दोनों का काम है कि लोगों लगातार प्रोत्साहित करना और तीसरा वाला जो मिला उसने भी यही कहा कि बस आप पहुंच ही गए हैं। शाम होने से पहले पहले पहुंच जाएंगे। हम सबका काम  एक ही है इसीलिए हम एक दूसरे को देख करके मुस्कुरा रहे थे।

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मुझे मालूम है कि गांव दूर है, लेकिन तुम्हें अगर कहता कि 20 किलोमीटर चलना है तो शायद तुमसे इतना भी नहीं चला जाता। इन तीन लोगों ने हमें दो -दो -दो करके 6 किलोमीटर तो पार करवा दिए। 2 किलोमीटर के भरोसे हमने 6 किलोमीटर पार कर लिया ।  मुझे मालूम है की तुम थक चुके हो आगे एक बड़ा सा पेड़ है। इसके नीचे आराम करते हैं। आज की रात यही बिताते हैं। कल सुबह फिर से चलेंगे। चिंता मत करो, लेकिन याद रखना दुनिया में दूसरों को लगातार मोटिवेट करना मत भूलना कहानी बहुत छोटी है, लेकिन असल जिंदगी में भी हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं जो हमें इंस्पायरर करते और मोटिवेट करते चलते हैं। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो हमें डीमोटिवेट करते हैं ।

Moral of this story:

ज़िन्दगी में लोग कई तरह के मिलते है और मिलेंगे । हमें सिर्फ उन लोगो पर ध्यान देने की जरूरत है जो हमें पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा दे सके । और जिनसे हम कुछ सीख सके। नकारात्मक लोग न केवल हमें दुविधा में डालेंगे बल्कि हमें मंज़िल से भी भटका देंगे।

उन लोगो से करीबी बनाए रखे जो आपको उत्साहित और प्रेरित करते है।

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