सही काम करने के लिए हर समय सही होता है। Hindi Story on True Happiness

Inspirational story in hindi :-

Hello, आज मैं एक INSPIRATIONAL STORY लेकर आई हूं जो कि आप को ज़िन्दगी में आपको खुश रहना सिखाएगी और साथ ही साथ जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए आप को प्रेरित करेगी और आपको यह बताएगी कि आपको जिंदगी में किस तरीके से अपनी जिंदगी में पैसों के साथ-साथ खुद को मानसिक रूप से भी संतुष्ट करना जरूरी है| ताकि आप जिंदगी में हमेशा ऊपर की तरफ बढ़े है।यह कहानी आपको ज़िन्दगी में नए सेवा भाव का को जगाएगी ।

आज की कहानी एक अमीर सेठ की है । सेठ शहर में रहता था और उसके पास बहुत पैसा था। वह बहुत फैक्ट्रियों का मालिक था ।
एक शाम अचानक उसे बहुत बैचेनी हो रही थी । डॉक्टर को बुलाया गया और सारे जाँच करवाए गए, पर कुछ भी नहीं निकला । लेकिन उसकी बैचेनी  धीरे -धीरे बढ़ती गयी । उसके समझ में नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है । वह नींद की गोलियां भी खाने लग गया पर नींद आने को तैयार नहीं और ना ही बैचेनी कम हो रही ।
एक दिन रात को उठकर तीन बजे घर के बगीचे में घूमने लगा । घुमते -घुमते उसे लगा कि बाहर थोड़ा सा सुकून है तो वह बाहर सड़क पर पैदल निकल पड़ा। चलते- चलते हजारों विचार मन में चल रहे थे । अब वो घर से बहुत दूर निकल आया था । और थकान की वजह से वो एक चबूतरे पर बैठ गया। उसे थोड़ी शान्ति मिली तो वह आराम से बैठ गया ।

मानसिक शांति
मानसिक शांति Hindi Story on True Happiness

तभी एक कुत्ता वहाँ आया और उसकी चप्पल उठाकर ले गया । सेठ ने देखा तो वह दूसरी चप्पल उठाकर उस कुत्ते के पीछे भागा । कुत्ता पास ही बनी जुग्गी-झोपड़ीयों में घुस गया । सेठ भी उसके पीछे था ,सेठ को करीब आता देखकर कुत्ते ने चप्पल वहीं छोड़ दी और चला गया । सेठ ने राहत की सांस ली और अपनी चप्पल पहनने लगा । इतने में उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी ।
वह और करीब गया तो एक झोपड़ी में से आवाज आ रहीं थीं । उसने झोपड़ी के फटे हुए बोरे में झाँक कर देखा तो वहाँ एक औरत मैली सी चादर पर बैठी है और दीवार से सटकर रो रही हैं । और ये बोल रही है —हे भगवान मेरी मदद कर ओर रोती जा रहीं है ।
सेठ के मन में आया कि यहाँ से चले जाओ, कहीं कोई गलत ना सोच लें । वो थोड़ा आगे बढ़ा तो उसके दिल में ख़्याल आया कि आखिर वो औरत क्यों रो रहीं हैं, उसको क्या तकलीफ  है ? और उसने अपने दिल की सुनी और वहाँ जाकर दरवाजा खटखटाया ।
उस औरत ने दरवाजा खोला और सेठ को देखकर घबरा गयी । तो सेठ ने हाथ जोड़कर कहा तुम घबराओं मत ,मुझे जानना है कि तुम रो क्यों रही हो ।
उस औरत के आखों में से आँसू टपकने लगें । और उसने पास ही गोदड़ी में लिपटी हुई उसकी 7-8 साल की बच्ची की ओर इशारा किया । और रोते -रोते कहने लगी कि मेरी बच्ची बहुत बीमार है उसके इलाज में बहुत खर्चा आएगा । और में तो घरों में जाकर झाड़-ूपोछा करके जैसे-तैसे हमारा पेट पालती हूँ । में कैसे इलाज कराउ इसका ?
सेठ ने कहा-“तो किसी से माँग लो”। इसपर औरत बोली मैने सबसे माँग कर देख लिया खर्चा बहुत है कोई भी देने को तैयार नहीं । तो सेठ ने कहा तो ऐसे रात को रोने से मिल जायेगा क्या ?
तो औरत ने कहा-” कल एक संत यहाँ से गुजर रहे थे तो मैने उनको मेरी समस्या बताई, तो उन्होंने कहा बेटा-“तुम सुबह 4 बजे उठकर अपने ईश्वर से माँगो “।बोरी बिछाकर बैठ जाओ और उससे मदद माँगो वो सबकी सुनता है तो तुम्हारी भी सुनेगा ।
मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था । इसलिए में उससे माँग रही थीं और वो बहुत जोर से रोने लगी ।

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ये सब सुनकर सेठ का दिल पिघल गया और उसने तुरन्त फोन लगाकर एम्बुलेंस(ambulance) बुलवायी और उस लड़की को एडमिट करवा दिया । डॉक्टर ने डेढ़ लाख का खर्चा बताया तो सेठ ने उसकी जवाबदारी अपने ऊपर ले ली ,और उसका इलाज कराया । और उस औरत को अपने यहाँ नौकरी देकर अपने बंगले के सर्वेन्ट क्वाटर(servant quarter) में जगह दी । और उस लड़की की पढ़ाई का जिम्मा भी ले लिया ।
वो सेठ कर्म प्रधान तो था पर नास्तिक (Atheist)था । अब उसके मन में सैकड़ो सवाल चल रहे थे ।

सही काम करने के लिए हर समय सही होता है
सही काम करने के लिए हर समय सही होता है ।

क्योंकि उसकी बैचेनी तो उस वक्त ही खत्म हो गयी थी जब उसने एम्बुलेंस(ambulance) को बुलवाया था । वह यह सोच रहा था कि आखिर कौन सी ताकत है जो मुझे वहाँ तक खींच ले गयीं ? क्या यहीं ईश्वर हैं ? और यदि ये ईश्वर है तो सारा संसार आपस में धर्म ,जात -पात के लिये क्यों लड़ रहा है । क्योंकि ना मैने उस औरत की जात पूछी और ना ही ईश्वर ने जात -पात देखी । बस ईश्वर ने तो उसका दर्द देखा और मुझे इतना घुमाकर उस तक पहुंचा दिया । अब सेठ समझ चुका था कि कर्म के साथ सेवा भी कितनी जरूरी है क्योंकि इतना सुकून उसे जीवन में कभी भी नहीं मिला था ।

Moral of this story

इस कहानी से हमें यही सीखने को मिलती है कि जिंदगी में हर बार, हर चीज ,सिर्फ पैसा ही नहीं होता है सुकून का जीवन जीने के लिए कर्म के साथ हमें दया भाव भी रखना जरूरी है। जिस तरह सेठ के पास पैसा होने के बावजूद भी सुकून नहीं था, उसी तरह हमारी जिंदगी में भी हम सिर्फ पैसे के पीछे भागते हैं पैसे को ही सब कुछ समझते हैं पर असल जिंदगी में अगर हमें खुशी चाहिए और सुकून का अहसास चाहिए तो हमें हमारे विचार बदलने चाहिए और दूसरो के प्रति सेवा भाव दिखाना चाहिए |

From this story, we get to learn that every time in life, everything is not just money, to live a relaxed life, we need to have compassion with karma. Just as Seth did not have peace despite having money, similarly in our life, we only run after money, money is considered everything but in real life if we want happiness and feel relaxed, then we should Ideas should change and service should be shown to others.

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